चिड़ियाघर की सैर पर निबंध | Chidiya Ghar ki Sair 1000 Words

By | May 14, 2024

अगर आप चिड़ियाघर की सैर पर निबंध (Chidiya Ghar ki Sair) लिखना चाहते है, तो इस आर्टिकल के माध्यम से आसानी लिख सकते है|

चिड़ियाघर की सैर पर निबंध Chidiya Ghar ki Sair

भूमिका

कहा जाता है मन चंचल घोड़े के समान होता है। कभी यहाँ, कभी वहाँ, तो कभी यह, कभी वह आदि इसकी चंचल गति हैं। दूसरे शब्दों में यह कि कभी भी यह एक दशा में स्थिर नहीं रहता है। इस तरह निरन्तर यह तरह-तरह की उड़ाने भरता रहता है। फिर भी यह तनिक भी नहीं थकता है। इस प्रक्रिया में यह कभी आनंद से खिल उठता है, तो कभी निराशा में डूब भी जाता है। अपनी निराशा को दूर करने के लिए अपनी पूर्व स्थिति में सुधार-बदलाव लाता है। इसके लिए इसे अपेक्षित प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है।

इस तरह यह अपनी निराशावरोध को तोड़-तोड़ कर आशा में प्रफुल्लित हो उठता है। तैयारी-गर्मी की छुट्टी चल रही थी। हम अपनी मित्र-मंडली के साथ गपशप कर रहे थे। उस गपशप का विषय था कि गर्मी की छुट्टी में कुछ और सैर-सपाटा करना चाहिए। गपशप बढ़ती-बढ़ती उस विन्दु पर आ गयी कि सैर-सपाट के लिए चला गए। कहाँ चला जाए, इस प्रश्न को सुनते ही करे कहीं से कहा-‘चिड़िया घर की सैर के लिए चला जाए।

हमारा यह सुझाव अचानक तन्द आया। सब सहमत हो गए। फिर क्या हम चारों मित्र जोपर निश्चय के अनुसार दूसरे दिन ही चिड़िया घर की सैर के लिए अपने-अपने घर से रवाना हुए। हम लोग दिल्ली का चिड़िया घर देखने के लिए एक साथ बस में बैठकर चिड़िया घर पहुँच गए।

स्थिति– दिल्ली का चिड़ियाघर दिल्ली के पुराने किले के पास ही है। दिल्ली के पुराने किला अर्थात् कौरव-पाण्डवों का किला के साथ ही दिल्ली के चिड़िया घर की स्थिति शुरू हो जाता है, जो इसके साथ-साथ चलकर दूसती, तीसरी और चौथी दिशा में लगभग गोलाकार दिखाई देती है। इस तरह यह चिड़िया घर लगभग कई किलोमीटर की लम्बी चौड़ी एरिया में फैला हुआ है।

दिल्ली के चिड़ियाघर सीमा चार दीवार से घिरी हुई है, ताकि कोई जानवर इस से बाहर न आ सके। इस प्रकार चिड़िया घर का पूरी बाहरी सीमा एक सुरक्षित सीमा है, जो इसके जानवरों की सुरक्षा, देखभाल और उनसे होने वाले खतरों से बचाने की दृष्टि से बहुत ही उपयोगी और महत्त्वपूर्ण सिद्ध होती है।

स्वरूप– चिड़िया घर के मुख्य द्वार पर हमने और लोगों की तरह प्रवेश-टिकट लिए। इसके बाद चिड़िया घर में प्रवेश किए। सभी लोगों को तरह हम लोगों ने परम्परागत ढंग से एक ओर से चिड़िया घर के जानवरों को देखने का सिलसिला शुरू किया।

सबसे पहले हमने विभिन्न प्रकार के जल-जीव देखे। हमने देखा कि जालाब में तैरती हुई बत्तखें बड़ी ही स्वतंत्रतापूर्वक दर्शकों का ध्यान अपने ओर बार-बार आकर्षित कर रही हैं। उसी तरह हमने देखा कि रंग-बिरंगी मछलियाँ सबके मन को एक दूसरे से काफी भिन्न थे। हमने मगरमच्छ भी देखे थे। हमने उसे देखा कि यह जल में और जमीन पर बड़ी खुशी के साथ रह लेता है।

कुछ आगे बढ़ने पर हमने देशा कि हरी-भरी जमीन पर शाकाहारी जानवर विचर रहे हैं। उनमें गाय, घोड़ा, चमरी गाय, नीलगाय, घोड़रज, हाथी, ऊँट आदि प्रमुख थे। इस प्रकार के शाकाहारी जानवरों में गैंडा बड़ा ही अद्भुत और आकर्षक जानवर दिखाई दिया था। इस जानवर का यह खास विशेषता होती है कि यह हमेशा पानी के गढढे में ही रहता है।

चिड़िया घर की सैर करते-करते हुए हम छोटे-बड़े जीव-जन्तुओं की ओर पहुँच गए। वहाँ जाकर हमने देखा कि वहाँ छोटे-बड़े पक्षी परस्पर आनंद ले रहे थे। इनमें तोता, मैना, गौरैया, कबूतर, शुतुरमुर्ग, आस्ट्रेलिया में पाया जाने वाला एक विशेष प्रकार शुतुरमुर्ग, मुर्गा, मोर, बाज आदि आकर्षक पक्षी थे। जांधिल और हारिल पक्षी तो सबको बड़े ही अद्भुत लग रहे थे। इससे आगे बढ़ने पर हमने कुछ जहरीले और भयानक जीव-जन्तुओं को देखे ।

उनमें से साँप, बिच्छू, छरबेन, गिरगिट, छिपकली आदि थे। वहीं पर हमने बहुत ही बड़ा लगभग दस मीटर लम्बा एक ऐसा अजगर देखा, जिसकी मोटाई लगभग 30 से.मी. रही होगी। उसका वजन भी लगभग दो क्विंटल से कम न रहा होगा। उसे सभी दर्शक अपनी चकित आँखों से बार-बार देखते हुए बहुत ही भय खा रहे थे।

इसके बाद हम चिड़िया घर के उस क्षेत्र में पहुँच गए, जहाँ केवल हिंसक पशु थे, उनमें शेर, बाघ, चीता, भेड़िया, भालू हाथी आदि थे। वहाँ पर हमने एक ऐसे भयानक बाघ को देखा, जिसकी आँखें और पंजे बहुत ही बड़े और तेज-तर्रार थे। उसे देखकर ऐसा लगता था, मानो वह अभी निगल जाएगा। उसकी गर्जना सचमुच में दिल को दहलाने वाली थी।

इसके बाद हमने हाल ही में जंगल से लाए गए शेर-शेरनी और उसके बच्चों को देखा। शेरनी अपने बच्चों को दूध पिला रही थी, तो वहीं पर शेर बैठा हुआ अपने बच्चों की सुरक्षा के प्रति सजग और सावधान हुए बार-बार देख रहा था। भय शंका से वह कभी-कभी गुर्रा भी रहा था।

चिड़िया घर की सैर के अंतिम चरण में हमने वनमानुष को देखा। इसे देखकर हमने अनुभव किया कि किस तरह मनुष्य प्राचीन काल में अज्ञानता से ढका हुआ था। शाम होते-होते हम चिड़िया घर की पूरी सर कर चुके थे। घर आते-आते रात हो गयी। शत को बड़े अजीब-अजीव और रोचक सपने आप जो चिडिया घर की सैर से प्रभावित थे। हम आज भी उस सैर को नहीं भूल पाए हैं।


Chidiya Ghar ki sair 10 lines | चिड़िया घर पर निबंध


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