राष्ट्रीय एकता और अखंडता पर निबंध | Essay on National Unity and Integrity in Hindi

By | April 26, 2024

अगर आप राष्ट्रीय एकता और अखंडता पर निबंध (Essay on National Unity and Integrity in Hindi) तो इस आर्टिकल के माध्यम से आसानी से लिख सकते है |

राष्ट्रीय एकता और अखंडता पर निबंध Essay on National Unity and Integrity in Hindi

प्रस्तावना

हमारे देश का सम्पूर्ण ढाँचा एक नहीं हैं, फिर भी वह एक ही दिखाई देता है। इसका अभिप्राय यह है कि हमारे देश का स्वरूप भूगोल धर्म, जाति, संस्कृति, खान-पान, रहन-सहन, भाषा-बोली, शासन, व्यवस्था एक है। ऐसा इसलिए हमारे देश के स्वरूप की जो विभिन्न दिखाई देती हैं, सभी मिलकर के एक भारत देश का निर्माण करती हैं।

वह ठीक उसी प्रकार से सत्य और उपयुक्त है, जिस प्रकार विभिन्नता प्रकार के अंग मिता करके एक शरीर का स्वरूप तैयार करते हैं। इस प्रकार हमारा देश विश्व का एक ऐसा अनोखा और बेमिसाल देश है, जिसमें विविधता में एकता स्पार रूप से दिखाई देती है।

राष्ट्रीय-एकता के बाधक तत्त्व

चूँकि हमारे देश का स्वरूप विभिन्न है। अतएव उसे एक सूत्र या एक रूप में बनाए रखना बहुत ही कठिन और दुष्कर कार्य है। इस दृष्टि से यह कहना कदापि अनुचित और अप्रासंगिक नहीं होगा कि इसकी विभिन्नताएं ही इसकी एकता और अखंडता की एकमात्र बाधाएं और कठिनाइयां है।

हमारी राष्ट्रीय एकता के बाधक तत्त्वों में सबसे बड़ा तत्त्व है-धर्म, चूँकि हमारे देश में जातियों का जाल बिछा हुआ है-हिन्दू, मुसलमान, सिक्ख, ईसाई, बौद्ध, जैन आदि सम्प्रदाय के लोग हमारे देश के एक कोने से दूसरे कोने में रहते हैं। इनके ही नाम पर धर्म के रूप भी हमारे देश में चारों ओर फैले हुए हैं। इस प्रकार हिन्दू-धर्म, इस्लाम धर्म, सिक्ख धर्म, ईसाई धर्म, बौद्ध धर्म, जैन धर्म आदि हमारे देश की धार्मिक स्थिति है।

इससे हमारे देश स्वरूप बतौर सुन्दर ढंग से रहते हुए भी धार्मिक टकराहट के फलस्वरूप बहुत ही भयानक और घृणित हो जाता है। यह स्थिति तब उत्पन्न होती है, जब एक धर्म दूसरे धर्म को हेय और घृणित हो जाता है। जब एक धर्म दूसरे को नीचा और उपेक्षित करने का प्रयास करने लगता है, तब स्थिति बहुत विगड़ने लगती है। परस्पर नफरत की ज्वाला में दोषी और निर्दोषी सभी जल-भुन विनष्ट होने के लिए कमर कस लेते हैं।

इस प्रकार के दुस्साहस और अनुचित कदम उठाने से तरह-तरह के अमानवीय और घोर पशुतापूर्ण कार्य होने लगते हैं। उस समय किसी प्रकार की उदारता, सहिष्णुता, सरसता, सामाजिकता, राष्ट्रीयता, मानवता आदि का बिल्कुल ही ध्यान नहीं रहता है। फिर समझ और विवेक से तो कोसों दूर पड़ा रहता है। ये सभी अशोभनीय और मानवता विरोधी कार्य धर्मान्थ, असामाजिक, घोर स्वार्थी, अवसरवादी और राष्ट्र-द्रोही व्यक्तियों की क्षुद्र मानसिकता के ही फलस्वरूप घटित होते हैं।

हमारी राष्ट्रीय एकता का दूसरा बाधक तत्त्व है-क्षेत्रीयता का संकीर्ण दृष्टिकोण। यह दृष्टिकोण बहुत ही भ्रमपूर्ण और अज्ञान पूर्ण दृष्टिकोण है। यही कारण है कि दक्षिण भारतीय उत्तर भारतीय राष्ट्र-भाषा हिन्दी को लेकर परस्पर तनाव ग्रस्त हो जाते हैं। क्षेत्रवादी दृष्टिकोण का ही यह परिणाम है कि उत्तर भारतीय दक्षिण भारतीय पर अपना अस्तित्व बनाए रखने के लिए अपनी अलग ही नजरिया प्रस्तुत करता रहता है।

एकता के महत्त्व

राष्ट्रीय एकता और अखण्डता का महत्त्व किसी भी राष्ट्र के लिए निश्चय ही बहुत महत्त्व होता है। इससे न केवल राष्ट्र की सुरक्षा मजबूत रहती है, अपितु इससे राष्ट्रीय विकास और प्रभाव भी बहुत अधिक होते हैं।

अगर किसी राष्ट्र की राष्ट्रीय एकता और अखण्डता नहीं रहेगी, तो वह राष्ट्र भी नहीं रहेगा, अर्थात् उस राष्ट्र का अस्तित्व समाप्त हो जायेगा। वह अपने बजूद को खोकर सदैव के लिए नेस्तनाबूत हो जायेगा। इसलिए राष्ट्रीय एकता और अखण्डता की आवश्यकता प्रत्येक राष्ट्र के लिए होती है। इससे राष्ट्र में चारों ओर अद्भुत अमन-चमन का माहौल सदेव बना रहता है।

राष्ट्रीय एकता और अखंडता पर निबंध

राष्ट्र आन्तरिक और बाह्य दोनों ही दृष्टियों से अत्याधिक सरवित उसके विकास की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ती हुई अन्य राष्ट्रों की तुलना उसके सिफल दिखाई देने लगती है। फिर वह विकासशील राष्ट्र के स्थान पर विकसित राष्ट्रों की श्रेणी को प्राप्त करके गर्व से झूम उठता है। उसकै प्रत्याश वासी को अपने इस राष्ट्र पर बहुत बड़ा स्वाभिमान करने का सुन्दर अवसर प्राप्त हो जाता है।

इस दृष्टि से किसी राष्ट्र की राष्ट्रीय एकता और उसकी अखण्डता उस राष्ट्र की सभी प्रकार की भाषा, जाति, सम्प्रदाय, यक संस्कृति, क्षेत्र खान-पान आदि विभिन्नताओं को सिर उठाने का कभी और किसी प्रकार से अवसर नहीं प्रदान करती है। वह तो किसी प्रकार असमानता और विषमता को एकता, समानता और सरलता में ही बदल करके देशीत्यान को ही महत्त्व देने के लिए अपनी पुर जोर कोशिश किया करती हैं।

राष्ट्रीय-एकता और अखण्डता कैसे हो ?

राष्ट्रीय एकता और अखण्डता परस्पर मेल-मिलाप की भावना से उत्पन्न होती है। इसके लिए हमें अपने स्वार्थों से ऊपर उठना होगा। अपनी हानि, अपने लाभ, अपने दुःख-सुख, अपने मान-सम्मान आदि की तिलांजली देनी पड़ेगी। हमें नाना प्रकार के ऐसे-ऐसे संघर्षों का सामना करना पड़ेगा, जो हमारी देश-भक्ति की परीक्षा-स्वरूप होंगे।

हमें उन कठिनाइयों और मुसीबतों को गले लगाना पड़ेगा, जो हमारी राष्ट्रीय देश-भक्ति की परीक्षा-स्वरूप होंगे। हमें उन कठिनाइयों और मुसीबतों को गले लगाना पड़ेगा, जो हमारी राष्ट्रीय भावनाओं को कुचलने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगी। राष्ट्रीय एकता और अखण्डता के लिए हमें जीवन में संसार से ऐसी सीख भी सीखनी पड़ेगी, जिनसे हमारे अंदर राष्ट्रीय एकता और अखण्डता की भावना अंकुरित होकर पल्लवित हो सके।

उपसंहार : Essay on National Unity and Integrity in Hindi

प्रत्येक देश के योगदान से ही देश की एकता और अखण्डता सुरक्षित रह सकती है। यह तभी संभव है, जब सभी देशवासी तन-मन से अपने देश की एकता और अखण्डता के लिए प्रत्येक कार्य की पूरी ईमानदारी और सच्चाई से करता रहे। इस तरह कार्य करते हुए किसी प्रकार में इस पुनीत कार्य में क्षेत्रवाद, भाषावाद आदि राष्ट्रीय एकता और अखण्डता के विरोधी तत्त्वों को आड़े नहीं आने देना चाहिए। इसके लिए यह भी आवश्यक है कि हमारी सोच और समझ सदैव यही चनी रहनी चाहिए कि एकता में अनेकता यही है हमारी सांस्कृतिक विशेषता है यह भी कि हमारा अस्लिल तभी तक कायम है, जब तक हमारी यह संस्कृितिक विरामत विद्यमान है |

इस प्रकार आप इस आर्टिकलके माध्यम से आसानी से राष्ट्रीय एकता और अखंडता पर निबंध | Essay on National Unity and Integrity in Hindi लिख सकते है |

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