Essay on Plastic in Hindi | प्लास्टिक प्रदूषण पर निबंध

By | November 6, 2023

Essay on Plastic in Hindi : अगर आप प्लास्टिक प्रदूषण पर निबंध लिखना चाहते है तो, इस आर्टिकल के माध्यम से आसानी से लिख सकते है |

Essay on Plastic in Hindi प्लास्टिक प्रदूषण पर निबंध

Essay on Plastic Pollution in Hindi | प्लास्टिक के हानिकारक प्रभावों


आज हम वैज्ञानिक युग में है | इस युग में रहते हुए हम यह अनुभव करते है और हम यह देखते है कि विज्ञान हमें वरदान के रूप में मिला है, तो अभिशाप के रूप में भी यह कम नहीं है | यह भी हमने देख भी लिया है और मान भी लिया है की विज्ञान का वरदान और अभिशाप पक्ष हमारी उपयोगिता की दृष्टि से है |

इसलिए विज्ञान को सरासर वरदान मन लिया जाना या इसे एकदम अभिशाप के रूप में समझ लेना हमारी कोरी मुर्खता सिद्ध होगी | इसप्रकार इसका वरदान या अभिशाप होना हमारी उपयोगिता पर निर्भर करता है | इस संदर्भ में हम प्लास्टिक की थैली को यहाँ हम ले रहे है |

यह हम बखूबी जानते है कि विज्ञान की देन में प्लास्टिक का कम महत्व नहीं है | आज प्लास्टिक का प्रभाव इतना बढ़ गया है कि यह हमरी दैनिलगातार होने आवश्यकता का एक अभिन्न अंग बन गया है | इसका मुख्य कारण यही है कि यह बहुत सुविधाजनक हो गया है |

पीतल और ताम्बें जैसी महँगी कठिनता से प्राप्त होने वाली वस्तुओ की अपेक्षा प्लास्टिक अधिक सस्ता और सहज वस्तु दिखाई देती है | इसलिए प्लास्य्टिक का उत्पादन विश्व के सभी देशो में बढ़ा लिए है | कुछ वर्ष में ऐसा लगता है कि इसका उत्पादन 30-35 लाख टन बढ़ जायेग | इसका यही कारण है कि प्लास्टिक का उत्पादन इसकी खपत के फलस्वरूप लगातार बढता ही जा रहा है

प्लास्टिक के उत्पादन की वृद्धि का कारण इसकी बढती हुई उपयोगिता ही है हमारे जीवन के प्रतेक क्षेत्रो में प्लास्टिक ने जो बढत बनायीं है उसमे उसकी थैलियो का महत्वपूर्ण स्थान है यह कहना किसी प्रकार से समुचित और यथार्त होगा की आज पुरे संसार में पोलीथिन ने अपनी छाया फेला दी है |

अतयव विश्व का आज ऐसा शायद ही कोई व्यक्ति होगा जिसने पोलीथिन का नाम न सुना हो और जिसमे पोलीथिन घर -घर की बहुत बड़ी आवश्कता की वस्तु बन गई है | पोलीथिन बनाने के लिए आवश्यकता अनुसार अनेको प्रकार के रंगों का उपयोग किया जाता है |

प्लास्टिक में अनेक रंगों के पिगमेंट मिलाकर रंग -बिरंगे लिफाफे बनाये जाते है | जीवन के अन्य छत्रो की तरह कुषी के छेत्र में भी प्लास्टिक थैलियो की भूमिका बहुत बड़ी दिखाई दे रही है | इस तरह यह कृषि क्षेत्र में अपनी अधिक और व्यपार का उपयोगिता प्रस्तुत कर रही है |

हम देख रहे है कि विकसित देशो में प्लास्टिक की थैली और कृषि का अटूट सम्बन्ध हो गया है | अमेरिका, जापान व यूरोप के अनेक देशों के किसानो ने प्लास्टिक थैलियों के हर संभव लाभ और उपयोग लिया है | इस दृष्टि से हमारा देश भारत भी पीछे नहीं है | यहाँ भी किसानों सहित व्यपारियों आदि ने भी इसकी उपयोगिता भुत बड़े पैमाने पर शुरू कर दिए है |

प्लास्टिक का अधिक उत्पादन सदैव हानिकारक होती है| यह हम देख रहे है कि प्रकृति द्वारा उपलब्ध कराई गई वस्तुवो की तुलना विज्ञानप्रदत प्लास्टिक की थैलियों अत्यधिक उपयोगी हो कर भी हानिकारक सिद्ध हो रही है | प्लास्टिक की थैलियों के हानिप्रद होने के कारणों पर जब हम विचार करते है , तो हम यह पाते है कि प्लास्टिक के थैलियो में प्राकृतिक रूप से विघटित होने की क्षमता नहीं होती है |

प्लास्टिक जल्द विघटित नहीं होता है जिससे प्रदुषण की समस्या होने लगती है | जिससे हमारे स्वास्थ पर बुरा असर पड़ने लगता है | धीरे-धीरे यह समस्या पर्यावरण के लिए एक बहुत बड़ा प्रदुषण तैयार करने लगी है | प्लास्टिक के थैलियो में होने वाली हानियों के विषय में हम यह कह सकते है की उत्पादन की प्र्क्रियओं से लेकर उपयोग के विभन्न तरीको तक यह प्रदुषण के प्रमुखकारणों में से एक है |

यह सच है कि प्लास्टिक की थैलियाँ विशुद्ध कार्बनयुक्त रासायनिक पदार्थो से तैयार होती है | इसलिए जब इसकी उत्पादन प्रक्रिया शुरू होती है, तब उस समय इससे गैसों का रिसना शुरू होता है | इससे कामगारों के स्वास्थय पर बिल्कुल बुरा प्रभाव पड़ता है और साथ-साथ पर्यावरण दूषित होता है |

प्लास्टिक की थैलियाँ उपयोग करने के बाद इधर-उधर गड्ढो उधर नालियों में फेक दी जाती है | इनसे प्रदुषण फैलता है | ये नालियों और गड्ढो में फस क्र बंद कर देता है, जिससे उन्हें विनष्ट करना मुश्किल होता है | जमीन के उपरी भाग पर फैली कूड़ा प्रकाश संस्लेषण की प्रक्रिया को दुस्प्रभावित करता है | पानी में रही प्लास्टिक जल प्रदुषण की समस्या उत्पन करती है |

सुचमुच में आज प्लास्टिक की थैलियाँ पर्यावरण के लिए चिंताजनक सिद्ध हो रही है | प्लास्टिक के थैलियों को लेकर आज सरकारे चिंतित है | इसलिए सरकार ने देश में प्लास्टिक कल्चर पर नियत्रण एवं विकास की जरुरत को सैद्धानिक रूप से ऍन. सी. ऐ की सिफारिशों के आधार पर स्वीकार कर लिया है |


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